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अंजुमन-ए-इस्लाम: 150 साल से तालीम की लौ जलाता हुआ मुंबई का सबसे बड़ा इदारा

Shoaib Miyanoor | | views
अंजुमन-ए-इस्लाम: 150 साल से तालीम की लौ जलाता हुआ मुंबई का सबसे बड़ा इदारा

अंजुमन-ए-इस्लाम: 150 साल से तालीम की लौ जलाता हुआ मुंबई का सबसे बड़ा इदारा



मुंबई (कमर अहमद):- मुंबई की धरती पर 1874 में जब बैरिस्टर बदरुद्दीन तय्यब जी ने अंजुमन-ए-इस्लाम की बुनियाद रखी थी, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक छोटा सा मदरसा एक दिन मुसलमानों की तालीम का सबसे बड़ा ठिकाना बन जाएगा। उस वक्त मुसलमानों के पास स्कूल-कॉलेज न के बराबर थे। तय्यब साहब की सोच बिल्कुल साफ थी - "कौम को अगर गरीबी और पिछड़ेपन से निकालना है तो हाथ में किताब दो, कलम दो"। उनकी यही नेक नीयत थी कि मुस्लिम लड़के-लड़कियां डॉक्टर, इंजीनियर, वकील बनें और देश की तरक्की में कंधे से कंधा मिलाकर चलें।*


*आज 150 साल बाद अंजुमन के पास 110 से ज़्यादा स्कूल-कॉलेज हैं और 1 लाख से ज़्यादा बच्चे पढ़ते हैं। खास बात ये कि इनमें 60 से 70% बच्चे गैर-मुस्लिम हैं। यानी ये इदारा सिर्फ मुसलमानों का नहीं, पूरे हिंदुस्तान का है। यहां मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग, लॉ, फार्मेसी, आर्किटेक्चर, नर्सिंग कॉलेज, अस्पताल, अनाथखाने और स्किल सेंटर तक चल रहे हैं। लड़कियों की पढ़ाई पर अंजुमन का खास ज़ोर रहा है। गरीब घर की बच्चियों के लिए हॉस्टल, स्कॉलरशिप और नौकरी के लिए ट्रेनिंग भी दी जाती है।*


*इस इदारे को नई ऊंचाई देने वाले हैं मौजूदा सदर डॉ. जहीर काज़ी साहब। आप खुद बड़े रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर हैं और पिछले 15 साल से अंजुमन के प्रेसिडेंट हैं। आपके टाइम में अंजुमन ने मॉडर्न लैब, प्लेसमेंट सेल, डिजिटल क्लासरूम और विदेशी यूनिवर्सिटी से टाई-अप शुरू किए। MIT अमेरिका और वेस्टमिंस्टर यूनिवर्सिटी लंदन से भी पढ़ाई का करार हुआ है। कोविड में आपने गरीब बच्चों की फीस माफ कर दी और ऑनलाइन क्लास का इंतज़ाम किया। 2024 में सरकार ने आपको पद्म श्री अवॉर्ड दिया।*


*डॉ. जहीर काज़ी साहब से मुझे भी दो बार मिलने का मौका मिला। मिल कर उनकी काम करने की सलाहियतों को मैंने महसूस किया कि डॉ. काज़ी साहब कौम के लिए, देश के लिए बेहतरीन सोच रखने वाली शख्सियत हैं। उनकी मेहनत और इंसानियत वाली सोच से आज उस इदारे से नौजवान पीढ़ी फायदा उठा रही है जिसकी कौम को सख्त जरूरत है। डॉ. काज़ी का मानना है कि सरकार के साथ मिलकर ही कौम का भला हो सकता है। आप खुद कहते हैं: "जब से मोदी सरकार आई है, अंजुमन को कभी कोई भेदभाव नहीं झेलना पड़ा। नए कॉलेज खोलने हों या इदारे को बढ़ाना हो, सरकार से पूरा सपोर्ट मिला है। अंजुमन-ए-इस्लाम माइनॉरिटी का इदारा है पर इसके दरवाजे हमेशा हर पढ़ने वाले बच्चे के लिए खुले हैं।"*


*24 अप्रैल 2026 को डॉ. जहीर काज़ी साहब को NSA अजीत डोभाल ने देश के 16 बड़े मुस्लिम लीडरों के साथ मीटिंग में बुलाया था। ये मीटिंग मुसलमानों ने खुद सरकार से मांगी थी। इसमें बड़े बिज़नेसमैन, AIIMS की डॉक्टर, AMU की वाइस चांसलर और हज कमेटी की चेयरपर्सन भी थीं। डोभाल साहब ने डेढ़ घंटे तक सबकी बात सुनी और कहा - "हिंदुस्तान एक जहाज़ है, हम सब साथ चलेंगे तो पार लगेंगे, वरना सब डूबेंगे"। डॉ. काज़ी साहब ने वहां अंजुमन का काम रखा और बताया कि कैसे 1 लाख बच्चों को तालीम देकर मुल्क को मज़बूत किया जा रहा है।*


*बदरुद्दीन तय्यब जी ने जो पौधा लगाया था, डॉ. जहीर काज़ी उसे बड़ा दरख्त बना रहे हैं। अंजुमन आज सिर्फ स्कूल नहीं, बल्कि उम्मीद का नाम है। 150 साल की इस विरासत को बचाना और आगे ले जाना हम सबका काम है। तय्यब साहब की नीयत और काज़ी साहब की मेहनत बस यही सिखाती है - "पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, तालीम ही तरक्की की चाबी है"।*


*"उठो मेरे दुनियां के गरीबों को जगा दो,*

*काख-ए-उमरा के दर-ओ-दीवार हिला दो।*

*जिस खेत से दहक़ाँ को मयस्सर न हो रोज़ी,*

*उस खेत के हर खोशा-ए-गंदुम को जला दो।।"*

*- अल्लामा इक़बाल*


लेखक:- *पत्रकार*

*क़मर अहमद, बीबीसी न्यूज़ चैनल संवाददाता,नई दिल्ली*

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