नवी मुंबई |
प्रेस कार्ड और आरएनआई नंबर की आड़ में चल रही फर्जी पत्रकारिता और वसूली के धंधे का एक बड़ा मामला नवी मुंबई के सानपाड़ा क्षेत्र में सामने आया है। यहां एक महिला स्पा संचालिका से पांच वर्षों में ₹43.46 लाख की ब्लैकमेलिंग करने वाले बाप-बेटे पर गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। यह प्रकरण पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर चोट करने वाले उस साए की पोल खोलता है, जिसमें कई यू-ट्यूब पत्रकार और नाममात्र के साप्ताहिक से जुड़े लोग सिर्फ डर दिखाकर अवैध वसूली कर रहे हैं — और खुद को ‘पत्रकार’ कहकर संरक्षण प्राप्त करने की कोशिश करते हैं। नेरुल निवासी पीड़िता (उम्र 40 वर्ष) ‘न्यू स्टेटस स्पा’ नाम से एक वैध आयुर्वेदिक स्पा सेंटर चलाती हैं। यहां पांच महिला कर्मचारी केवल कायदेबद्ध आयुर्वेदिक अभ्यंग व उपचार की सेवाएं देती हैं। वर्ष 2020 में विक्रोली के सिराज अहमद इद्रीस चौधरी और उसका बेटा वसीम अहमद चौधरी उनके स्पा में पहुंचे। दोनों ने खुद को ‘महाराष्ट्र क्राइम्स’ नामक मासिक पत्रिका के संपादक-पत्रकार बताया और आरोप लगाया कि उनके स्पा में नाबालिग लड़कियों से अनैतिक गतिविधियां करवाई जाती हैं। उन्होंने धमकी दी कि इस विषय पर वीडियो बनाकर वायरल कर देंगे, पुलिस रेड कराएंगे और समाज में बदनामी करेंगे। डर के मारे पीड़िता ने उस समय से हर महीने ₹50,000 का भुगतान करना शुरू कर दिया। शुरुआत में यह भुगतान नकद होता था, लेकिन अप्रैल 2021 से अधिकांश रकम बैंक खातों के माध्यम से ट्रांसफर की गई। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस दौरान कुल ₹29,46,701 रुपए की राशि ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिये भेजी गई। शेष रकम भी ईद, शराब पार्टी और यात्रा के नाम पर वसूली गई। पीड़िता की शिकायत में यह स्पष्ट किया गया है कि सिराज और वसीम दोनों आदतन अपराधी हैं और इस तरह की धमकियों के जरिए पहले भी कई स्पा संचालकों से पैसे वसूल चुके हैं। वे कहते थे – “मीडिया हमारी जेब में है”, “पुलिस से संपर्क है”, “तेरा स्पा बंद करा देंगे”, और इस तरह मासिक ‘हफ्ता’ वसूल करते रहे।
पुलिस के मुताबिक सिराज चौधरी पहले ही एक बलात्कार के मामले में गिरफ्तार हो चुका है, जबकि वसीम चौधरी की PITA एक्ट के तहत अग्रिम जमानत याचिका हाल ही में खारिज की गई है। सानपाड़ा पुलिस थाने में दोनों के खिलाफ खंडणी, धोखाधड़ी, धमकी और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। बैंक लेन-देन, कॉल रिकॉर्ड्स और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है। संभावना है कि जांच के दौरान और भी स्पा व्यवसायियों के साथ हुई ब्लैकमेलिंग की घटनाएं सामने आएंगी। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसमें सामने आए पत्रकारिता से जुड़े दस्तावेज, प्रेस कार्ड और आरएनआई नंबर, जिनकी वैधता आज सवालों के घेरे में है, एक चलन बन चुके हैं। कई ऐसे साप्ताहिक और पत्रिकाएं हैं जो वर्षों से प्रकाशित नहीं होतीं, जिला सूचना कार्यालय के संज्ञान में नहीं हैं, और जिनके नाम पर केवल ‘प्रेस’ लिखा कार्ड छपवाकर लोग तथाकथित पत्रकार बन चुके हैं। यूट्यूब चैनलों के माध्यम से ये फर्जी पत्रकार समाज में ‘खुलासों’ और ‘स्टिंग’ के नाम पर वैध कारोबारियों को डराकर उगाही करते हैं।
बॉक्स में बोल्ड करके डाले , बॉडर लाइन भी दे
*यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत शिकायत या अपराध का मामला है, बल्कि पूरे प्रेस तंत्र की गरिमा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते ऐसे बोगस पत्रकारों पर नकेल नहीं कसी गई, तो आने वाले समय में यह प्रवृत्ति और भी खतरनाक रूप ले सकती है। प्रशासन से अपेक्षा है कि ऐसे फर्जी साप्ताहिकों की सार्वजनिक सूची जारी की जाए और प्रेस के नाम पर चल रहे इस ‘वसूली तंत्र’ को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए।*

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