लखनऊ में अधूरा ओवरब्रिज बना विकास में रोड़ा, रास्ते में आई बिल्डिंग बनी बाधा

रिपोर्ट – फरियाद अली
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बन रहा एक रेलवे ओवरब्रिज इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। वजह – पुल के रास्ते में आई एक निजी बिल्डिंग, जिसकी वजह से 74 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना पिछले आठ महीनों से अधर में लटकी हुई है।
यह ओवरब्रिज राजाजीपुरम क्षेत्र में बन रहा है, जिसका शिलान्यास वर्ष 2023 में देश के रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने किया था। इसका उद्देश्य रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम से निजात दिलाना था, लेकिन पुल निर्माण के दौरान जब कार्य राजेश यादव नामक व्यक्ति के मकान तक पहुंचा, तो निर्माण रोकना पड़ा।
पिछले आठ महीनों से यही मकान पुल निर्माण में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। प्रशासनिक स्तर पर न तो समय रहते उचित कार्यवाही की गई और न ही निर्माण मार्ग को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया गया।
अखिलेश यादव के पोस्ट के बाद हरकत में आया प्रशासन
19 जून को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस अधूरे पुल का मुद्दा उठाया। उन्होंने तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि “भोपाल के 90 डिग्री वाले पुल के बाद अब लखनऊ का यह पुल देखिए, जहां एक बिल्डिंग पुल का रास्ता रोक रही है।”
यह पोस्ट वायरल होते ही प्रशासन सक्रिय हुआ और उसी दिन, यानी 19 जून को, लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की ओर से मकान मालिक राजेश यादव के नाम नोटिस चस्पा कर दिया गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस अधूरे पुल के कारण रेलवे फाटक पर घंटों लंबा जाम लगता है। रोजाना स्कूली बच्चे, ऑफिस जाने वाले लोग और मरीज एंबुलेंस में फंसे रहते हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन को पहले से इस मकान की स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए थ
लखनऊ का यह ओवरब्रिज एक बार फिर यह साबित करता है कि यदि परियोजनाओं की योजना ठीक से नहीं बनाई जाए, तो विकास बाधित हो जाता है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मकान को कब हटवाकर निर्माण कार्य दोबारा शुरू करवाता है, ताकि जनता को राहत मिल सके और यह पुल किसी मज़ाक का विषय न बनकर विकास का प्रतीक बन सके।

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