मिशन गेहूं खरीद का महाअभियान शुरू
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। योगी सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए ‘मिशन गेहूं खरीद’ का महाअभियान सोमवार से पूरे प्रदेश में शुरू करने का ऐलान कर दिया है। इस बार सरकार ने खरीद लक्ष्य को 30 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर सीधे 50 लाख मीट्रिक टन कर दिया है, जिससे साफ संकेत है कि अधिक से अधिक किसानों की उपज सीधे सरकारी खरीद में शामिल की जाएगी और उन्हें उचित मूल्य मिलेगा।
सरकार ने इस बार गेहूं खरीद को पूरी तरह किसान-हितैषी और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2585 प्रति कुंतल तय किया गया है, जो पिछले साल से ₹160 ज्यादा है। इसके साथ ही किसानों को राहत देने के लिए ₹20 प्रति कुंतल अतिरिक्त बोनस भी दिया जाएगा, जिससे कुल आय में सीधा फायदा होगा। सबसे बड़ी बात यह है कि मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए हैं कि खरीद के 48 घंटे के भीतर भुगतान सीधे डीबीटी के माध्यम से किसानों के बैंक खाते में पहुंच जाए, ताकि उन्हें किसी तरह की देरी या बिचौलियों का सामना न करना पड़े।
प्रदेश में खरीद व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की गई हैं। सरकार का लक्ष्य 6500 गेहूं क्रय केंद्र स्थापित करने का है, जिनमें से 3574 केंद्र पहले ही सक्रिय हो चुके हैं। सभी केंद्र सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक खुले रहेंगे। बढ़ती गर्मी को देखते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि हर केंद्र पर किसानों के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं, ताकि अन्नदाता को किसी तरह की परेशानी न हो।
पूरी खरीद प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर सरकार ने बिचौलियों की भूमिका खत्म करने का दावा किया है। किसान अब fcs.up.gov.in पोर्टल या ‘UP KISAN MITRA’ ऐप के जरिए घर बैठे पंजीकरण या नवीनीकरण कर सकते हैं। किसी भी समस्या या शिकायत के समाधान के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-0150 भी जारी किया गया है।
सरकार की इस योजना को लेकर किसानों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। अब तक 2.24 लाख से अधिक किसान पंजीकरण करा चुके हैं, जो इस बात का संकेत है कि किसान सरकारी खरीद व्यवस्था पर भरोसा जता रहे हैं और अपनी फसल का सही मूल्य पाने के लिए तैयार हैं।
योगी सरकार का ‘मिशन गेहूं खरीद’ किसानों की आय बढ़ाने और बिचौलियों पर लगाम कसने की दिशा में बड़ा कदम साबित होने जा रहा है। अब देखना होगा कि यह महाअभियान जमीन पर कितना असर दिखाता है और किसानों को कितना सीधा लाभ पहुंचाता है।

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