मुंबई सेशंस कोर्ट ने सबूतों की कमी के कारण 2017 के गोवंडी मर्डर और लूटपाट मामले में 4 लोगों को बरी कर दिया...........
मुंबई: एक सेशंस कोर्ट ने सितंबर 2017 में गोवंडी के बैंगनवाड़ी इलाके में राशन की दुकान के मालिक की पत्नी की हत्या करने और दुकान से नकदी व सोने के गहने चुराने के आरोपी चार लोगों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि परिस्थितिजन्य सबूत उनके अपराध को साबित करने में नाकाम रहे।
आरोपियों – अशोक गुप्ता, राहुल सिंह, सत्यप्रकाश चौहान उर्फ बबलू और मेजरसिंह चौहान – के खिलाफ शिवाजी नगर पुलिस ने सुदर्शन गुप्ता की शिकायत पर मामला दर्ज किया था। उन्हें सितंबर 2017 में गिरफ्तार किया गया था और वे तब से जेल में थे।
सुदर्शन और उनकी पत्नी भानुमती दो राशन की दुकानें चलाते थे। भानुमती बैंगनवाड़ी स्थित अपने घर पर बनी दुकान संभालती थीं, जबकि सुदर्शन निंबोनिया बाग में दूसरी दुकान चलाते थे। सत्यप्रकाश और अशोक दुकान पर काम करते थे, लेकिन घटना से करीब एक महीने पहले अशोक को नौकरी से निकाल दिया गया था। 22 सितंबर 2017 को शाम करीब 5:45 बजे सुदर्शन को बबलू का फ़ोन आया कि भानुमती दुकान का शटर नहीं खोल रही हैं। बबलू दुकान के अंदर गया तो उसने भानुमती को खून से लथपथ हालत में पड़ा पाया।
सुदर्शन ने देखा कि बर्तन बिखरे हुए थे और अलमारी व सूटकेस खुले थे। आरोप है कि 1.76 लाख रुपये नकद और सोने के गहने गायब थे। भानुमती को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
सुदर्शन को शक था कि नौकरी से निकाले जाने की रंजिश के कारण अशोक ने यह अपराध किया है। बबलू के रिश्तेदार राहुल और मेजरसिंह अक्सर दुकान पर आते-जाते रहते थे।
अदालत ने माना कि भले ही भानुमती की मौत हत्या के कारण हुई थी, लेकिन घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था। अदालत ने कहा कि हथियार, नकदी और गहनों की कथित बरामदगी संदिग्ध थी और अभियोजन पक्ष ऐसी परिस्थितियों की पूरी कड़ी स्थापित करने में विफल रहा जो आरोपी को हत्या और डकैती से जोड़ती हो।

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